ગઇકાલે મુકેલા ગીત – વગડાનો શ્વાસ – ની સાથે ચંદ્રકાંતભાઇએ આ ગીત યાદ કરાવ્યું, તો મને થયુ.. ચલો, शुभस्य शीघ्रम 🙂
ખરેખર… ઘણીવાર કુદરતના અમુક રંગોને જોઇને તો એમ જ પૂછવાની ઇચ્છા થાય – ये किस कविकी कल्पना का चमत्कार है… !!
Movie Name: Boond Jo Ban Gayee Moti (1967) Singer: Mukesh Music Director: Satish Bhatia Lyrics: Bharat Vyas Year: 1967 Director: V Shantaram
ये कौन चित्रकार है, ये कौन चित्रकार
हरी हरी वसुंधरा पर नीला नीला ये गगन
के जिस पे बादलों की पालकी उडा रहा पवन
दिशाएं देखो रंगभरी
दिशाएं देखो रंगभरी, चमक रही उमंग भरी
ये किसने फूल फूल से किया शृंगार है
ये कौन चित्रकार है, ये कौन चित्रकार
तपस्वियों सी हैं अटल ये पर्वतों की चोटियां
ये बर्फ की घुमेरदार घेरदार घाटियां
ध्वजा से ये खडे हुए
ध्वजा से ये खडे हुए है वृक्ष देवदार के
गलीचे ये गुलाब के बगीचे ये बहार के
ये किस कवि की कल्पना
ये किस कवि की कल्पना का चमतकार है
ये कौन चित्रकार है, ये कौन चित्रकार
कुदरत की इस पवित्रता को तुम निहार लो
इनके गुणो को अपने मनमे तुम उतार लो
चमका लो आज लालीमा
चमका लो आज लालीमा अपने ललाट की
कण कण से झांकती तुम्हे छवि विराट की
अपनी तो आंख एक है, उसकी हज़ार है
ये कौन चित्रकार है, ये कौन चित्रकार