આજે ગુરુપૂર્ણિમાના દિવસે કબીરજીનું મને ખૂબ જ ગમતું પદ સાંભળીયે. સ્વર અને સ્વરાંકન પણ એવા સરસ છે કે વારંવાર સાંભળવાનું મન ચોક્કસ થાય.
मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे,
मैं तो तेरे पास में
ना तीरथ में , ना मूरत में
ना एकांत निवास में
ना मन्दिर में , ना मस्जिद में
ना काबे कैलास में
मैं तो तेरे पास में
बन्दे मैं तो तेरे पास में
ना मैं जप में , ना मैं तप में
ना में बरत उपवास में
ना मैं किरिया करम में
रहता नहीं जोग सन्यास में
नहीं प्राण में नहीं पिंड में
ना ब्रह्माण्ड अकास में
ना में प्रकुति प्रवर गुफा में
नहीं स्वसन की स्वांस में
खोजी होए तुरत मिल जाऊं
इक पल की तलास में
कहत कबीर सुनो भाई साधो
में तो हूँ विस्वास में
– संत कबीर
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(શબ્દો માટે આભાર : This ‘n That)






