Category Archives: Hindi (हिन्दी)

Hindi (हिन्दी)

Hindi (हिन्दी) શ્રેણીમાંના બધા પોસ્ટ (કક્કાવાર). સંપૂર્ણ પોસ્ટ માટે ક્લીક કરો.

मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे - संत कबीर
Asha - Lata duets..... (part-1)
अँखियाँ हरि दर्शन की प्यासी - सूरदास
अरे जा रे हट नटखट ....
इश्वर अल्लाह तेरे जहांमें ... - जावेद अख्तर
उसको नहीं देखा हमनें कभी........
एक अंधेरा, लाख सितारें.. एक निराशा, लाख सहारे....
एक मंत्र जपते रहो श्याम श्याम श्याम....
एक लडके को देखा तो ऐसा लगा..
एक ही ख्वाब कइ बार देखा है मेंने...
कभी किसीको मुकम्मिल जहां नहीं मिलता
कर ना सके हम प्यार का सौदा...
कुछ लम्हे ऐसे होते है - વિરલ રાચ્છ
कुछ मस्तीभरे पल... किशोरदा के संग
घर आजा घिर आये बदरा साँवरिया....
छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके. - अमीर खूसरो
जय माधव मदन मुरारी
तु मेरी झिंदगी है..
तू है मेरा प्रेम देवता...
पायोजी मैंने राम-रतन धन पायो - मीरांबाई
बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है - मिर्झा गालिब
भगवान,मोरी नैया... पार लगा देना
मन लागो मेरो यार फ़कीरी में ॥ - संत कबीर
मुझे इश्क हो गया... इश्क इश्क..
मेरे दो नैनों की ज्योति हो तुम - आणल अन्जारिया
ये कौन चित्रकार है....
रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिये आ… - एहमद फराज़
राम का गुणगान करिये....
राम भजन कर मन - લતા મંગેશકર
साहिब मेरा एक है – संत कबीर
हे शिवशंकर हे करुनाकर परमानन्द महेश्वर
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा - कैफ़ी आज़मी
થોડા Special हिन्दी ગીતો ....
નૈનન મેં હો નૈનન મેં રહો - પ્રેમાનંદ સ્વામી
ફાગણ ફેન્ટેસી - જય વસાવડા
Gurus of Peace - Nusrat Fateh Ali Khan, A. R. Rehman
H वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग जलते है
H हजारो ख्वाईशें ऐसी - मिर्झा गालिब
H हम करें राष्ट आराधन
H अब के हम बिछड़े तो ... - एहमद फराज़
H आज जाने की झिद ना करो
H इस बार नहीं... - प्रसून जोशी
H ए झिंदगी, गले लगा ले.....
H एक अकेला इस शहेर में...
H ऐ जज़्ब-ए-दिल गर मैं चाहुं - बहज़ाद लखनवी
H खामोशी में पुकार है.. (મૌન નો નાદ....)
H खुश्बू जैसे लोग मिले अफसाने में
H गझल मुझको कहेनी है - આસિમ રાંદેરી
H छुपालो युं दिलमें प्यार मेरा..
H डेडी ફિલ્મની ગઝલો
H दमादम मस्त कलंदर........
H दो दिवाने शहेरमें...
H ना तो कारवाँ की तलाश है... ...
H बजे सरगम हर तरफसे, गुंजे बनकर देश-राग..
H बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी.. - हसन कमाल
H मधुबनमें राधिका नाचे रे... .. - शकील बदायुनी
H मन लागो यार फकिरीमें.. - संत कबीर
H मनकुंतो मौला...
H मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा..
H मेहफुझ - पलाश सेन
H मैं चाहुं सपनोंमे बस साथ तुम्हारा हो...
H रोशन हुइ रात वो आसमांसे उतरके झमीं पे आया... - जावेद अख्तर
H वो कागझकी कश्ती, वो बारिशका पानी
H श्री गणेशाय धीमहि
H सब अपनी अपनी गतमें... - સુંદરમ્
H सांसोकी मालापे सिमरुं में... - नुसरत फतेहअली खान
H सुनाइ देती है जिसकी धडकन - गुलामी
H सोउं तो सपने मिलुं, जागुं तो मन मांही - संत कबीर
H हर एक बात पे कहेते हो तुम, के 'तु क्या है ?' - मिर्झा गालिब
H ज़िंदगी में तो सभी प्यार किया करते है - क़ातिल शिफाई
H ૐ નમ: શિવાય....
Happy ઉત્તરાણ.... !!!
Happy Birthday to શમ્મી કપૂર..!!
Your love is like a star...



साहिब मेरा एक है – संत कबीर

શબ્દો : સંત કબીર
સ્વર : આબિદા પરવીન
આલ્બમ : “કબીર by આબિદા”
રજૂઆત : ગુલઝાર
Commentary by Gulzar…

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

नशे इकहरे ही अच्छे होते हैं,
सब कह्ते हैं दोहरे नशे अच्छे नहीं
एक नशे पर दूसरा नशा न चढाओ
पर क्या है कि, एक कबीर उस पर आबिदा परवीन
सुर सरूर हो जाते हैं,
और सरूर देह कि मट्टी पार करके रूह मे समा जाता है

सोइ मेरा एक तो, और न दूजा कोये ।
जो साहिब दूजा कहे, दूजा कुल का होये ॥

कबीर तो दो कहने पे नाराज़ हो गये,
वो दूजा कुल का होये !

Abida starts singing…

साहिब मेरा एक है, दूजा कहा न जाय ।
दूजा साहिब जो कहूं, साहिब खडा रसाय ॥

माली आवत देख के, कलियां करें पुकार ।
फूल फूल चुन लिये, काल हमारी बार ॥

चाह गयी चिन्ता मिटी, मनवा बेपरवाह ।
जिनको कछु न चहिये, वो ही शाहनशाह ॥

एक प्रीत सूं जो मिले, तको मिलिये धाय ।
अन्तर राखे जो मिले, तासे मिले बलाय ॥

सब धरती कागद करूं, लेखन सब बनराय ।
सात समुंद्र कि मस करूं, गुरु गुन लिखा न जाय ॥

अब गुरु दिल मे देखया, गावण को कछु नाहि ।
कबीरा जब हम गांव के, तब जाना गुरु नाहि ॥

मैं लागा उस एक से, एक भया सब माहि ।
सब मेरा मैं सबन का, तेहा दूसरा नाहि ॥

जा मरने से जग डरे, मेरे मन आनन्द ।
तब मरहू कब पाहूं, पूरण परमानन्द ॥

सब बन तो चन्दन नहीं, सूर्य है का दल नाहि ।
सब समुंद्र मोती नहीं, यूं सौ भूं जग माहि ॥

जब हम जग में पग धरयो, सब हसें हम रोये ।
कबीरा अब ऐसी कर चलो, पाछे हंसीं न होये ॥

औ-गुण किये तो बहु किये, करत न मानी हार ।
भांवें बन्दा बख्शे, भांवें गर्दन माहि ॥

साधु भूख भांव का, धन का भूखा नाहि ।
धन का भूखा जो फिरे, सो तो साधू नाहि ॥

कबीरा ते नर अन्ध हैं, गुरु को कहते और ।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर ॥

करता था तो क्यों रहा, अब काहे पछताय ।
बोवे पेड बबूल का, आम कहां से खाय ॥

साहिब सूं सब होत है, बन्दे ते कछु नाहि ।
राइ से परबत करे, परबत राइ मांहि ॥

ज्यूं तिल मांही तेल है, ज्यूं चकमक में आग ।
तेरा सांई तुझमें बसे, जाग सके तो जाग ॥

– संत कबीर

(શબ્દો માટે આભાર : Dazed and Confused)

राम का गुणगान करिये….

 

સૌ મિત્રોને અમારા તરફથી દિવાળીની ખૂબ ખૂબ શુભેચ્છાઓ !….

સ્વર : પંડિત ભીમસેન જોષી અને લતા મંગેશકર
સંગીત : પંડિત ભીમસેન જોષી

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

राम का गुणगान करिये,
राम का गुणगान करिये।
राम प्रभु की भद्रता का,
सभ्यता का ध्यान धरिये॥

राम के गुण गुणचिरंतन,
राम गुण सुमिरन रतन धन।
मनुजता को कर विभूषित,
मनुज को धनवान करिये, ध्यान धरिये॥

सगुण ब्रह्म स्वरुप सुन्दर,
सुजन रंजन रूप सुखकर।
राम आत्माराम,
आत्माराम का सम्मान करिये, ध्यान धरिये॥

बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है – मिर्झा गालिब

સ્વર / સંગીત – જગજીત સીંગ

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे
[ baazeechaa = play/sport, atfaal = children ]

इक खेल है औरन्ग-ए-सुलेमाँ मेरे नज़दीक
इक बात है एजाज़-ए-मसीहा मेरे आगे
[ auraNg = throne, 'eijaz = miracle ]

जुज़ नाम नहीं सूरत-ए-आलम मुझे मन्ज़ूर
जुज़ वहम नहीं हस्ती-ए-अशिया मेरे आगे
[ juz = other than, aalam = world, hastee = existence, ashiya = things/items ]

होता है निहाँ गर्द में सेहरा मेरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मेरे आगे
[ nihaaN = hidden, gard = dust, sehara = desert, jabeeN = forehead ]

मत पूछ के क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख के क्या रंग है तेरा मेरे आगे

सच कहते हो ख़ुदबीन-ओ-ख़ुदआरा हूँ न क्योँ हूँ
बैठा है बुत-ए-आईना सीमा मेरे आगे
[ KHudbeen = proud/arrogant, KHud_aaraa = self adorer, but = beloved, aainaa_seemaa = like the face of a mirror ]

फिर देखिये अन्दाज़-ए-गुलअफ़्शानी-ए-गुफ़्तार
रख दे कोई पैमाना-ए-सहबा मेरे आगे
[ gul_afshaanee = to scatter flowers, guftaar = speech/discourse, sahaba = wine, esp. red wine ]

नफ़रत के गुमाँ गुज़रे है मैं रश्क से गुज़रा
क्योँ कर कहूँ लो नाम ना उसका मेरे आगे
[ gumaaN = doubt, rashk = envy ]

इमाँ मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे
[ kufr = impiety, kaleesa = church/cathedral ]

आशिक़ हूँ पे माशूक़फ़रेबी है मेर काम
मजनूँ को बुरा कहती है लैला मेरे आगे
[ farebee = a fraud/cheat ]

ख़ुश होते हैं पर वस्ल में यूँ मर नहीं जाते
आई शब-ए-हिजराँ की तमन्ना मेरे आगे
[ hijr = separation ]

है मौजज़न इक क़ुल्ज़ुम-ए-ख़ूँ काश! यही हो
आता है अभी देखिये क्या-क्या मेरे आगे
[ mauj_zan = exciting, qulzum = sea, KHooN = blood ]

गो हाथ में जुंबिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी साग़रो-मीना मेरे आगे
[ jumbish = movement/vibration, saaGHar-o-meena = goblet ]

हम-पेशा ओ’ हम-मशरब ओ’ हम-राज़ है मेरा
‘ग़ालिब’ को बुरा क्यों कहो, अच्छा मेरे आगे
[ ham_pesha = of the same profession, ham_masharb = of the same habits/a fellow boozer, ham_raaz = confidant ]

- मिर्झा गालिब

कुछ लम्हे ऐसे होते है – વિરલ રાચ્છ

ગુજરાતી તખ્તાના જાણીતા દિગ્દર્શક અને અભિનેતા – વિરલ રાચ્છ..! થોડા સમય પહેલા જ્યારે કાજલબેન અને વિરલભાઇને મળવાનું થયું – ત્યારે વિરલભાઇએ આ નઝમ સંભળાવી અને તરત જ ગમી ગઇ..! અને સાથે જ આપ સૌ સાથે વહેંચવાની ઇચ્છા થઇ આવી.. એટલે વિરલભાઇ પાસે એનું રેકોર્ડિંગ મંગાવ્યું..! આશા છે આ નઝમ આપ સૌને પણ એટલી જ ગમશે!

પઠન – વિરલ રાચ્છ

कुछ लम्हे ऐसे होते है.... (Grand Canyon 2011)

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

कुछ लम्हे ऐसे होते है
वो साथ हमेशा होते है
जब मंज़र चुप हो जाते है
वो दिल से बाते करते है

मसलन वो छोटा लम्हा
वो नानी का बुढ़ा कमरा
कमरे में बिखरी सी हुई
वो परियां और शैतान की बातें
रजाई में सुनते कट थी
शर्दी की वो लम्बे रातें
आज में उसी चार पाय पे तनहा हो कर बैठा हूँ
रजाइ के ज़रिये से जब उन लम्हों को सहलाता हूँ
वो सारे लम्हे एक साथ इस कमरे में आ जाते है
राजा ,रानी ,भालू ,शेर अपने साथ वो लाते हे
आज भी जब शैतान के डर से राज कुमारी रोती है
कमरे में बैठे बैठे मेरी आँखों को भिगोती है
ये लम्हे कभी ना मरते है ,
ये तो राजकुमार से होते है
हमेशा जिंदा रहते है
जब मंज़र चुप हो जाते है
वो दिल से बाते करते है
कुछ लम्हे ऐसे होते है….!

याद अभी तक है मुजको वो भीगा भीगा सा लम्हा
रात को छत पे आना उसका और बालो को बिखराती हवा
हवा और दुपट्टे के बिच में सरगोशी सी होती थी
वो कुछ भी ना कहते थी और लाखो बाते होती थी
वो दिल की बातो का होठो पे आते आते रुक जाना
नजरो का मिलते ही फिर शर्मा के उनका झुक जाना
कसम है उन नजारों की लम्हों को फिर से जीना है
वक्त के ज़रिये से उखड़े रिश्ते को फिर से सीना है
लेकिन इन बेहते लम्हों को हाथो में कैसे कैद करू
जैसे में मुट्ठी बंध करू वे बन कर रेत सरकते है
वो साथ हमेशा रहते है
जब मंज़र चुप हो जाते है
वो दिल से बाते करते है
कुछ लम्हे ऐसे होते है….!

इन छोटे मोटे लम्हों में कई फ़साने होते है
कहीं ख़ुशी से हसते है तो कभी वो गम में रोते है
ये लम्हे अजीब होते है जाने कहाँ से आते है ?
वक्त के पाबन्द होते है आते ही चले जाते है
लेकिन चाँद लम्हे होते है जो दिल में घर कर जाते है
गर्दिशो के दौर में हम उन लम्हों को जी लेते है
जाम बना कर अक्सर हम उन लम्हों को पी लेते है
ये लम्हे ही तो होते है हम सबको ज़िंदा रखते है
वो साथ हमेशा रहते है
जब मंज़र चुप हो जाते हे
वो दिल से बाते करते है
कुछ लम्हे ऐसे होते है …..!

- વિરલ રાચ્છ

मेरे दो नैनों की ज्योति हो तुम – आणल अन्जारिया

આજે ૧૩ મે, ૨૦૧૨ – બધી મમ્મીઓને હેપી મધર્સ ડે…..સાથે સાંભળીએ એક મમ્મીએ વ્હાલી દીકરીઓ માટે લખેલું આ સંદર ગીત……

गीत रचना और स्वर : आणल अन्जारिया

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

ला ला लाला ला ला लालाला …

राधिका तुम अम्बिका तुम,
मेरे दो नैनों की ज्योति हो तुम
नटखट सी हो नाज़ुक परी,
तुमने संवारी जिंदगानी मेरी,
मेरे दो नैनों की ज्योति हो तुम.

निर्मल सी है चुलबुली गुडिया,
बजते घुंघरू जब हसदे ज़रा
खुशियों से महेका है अंगना मेरा,
मेरे दो नैनों की ज्योति हो तुम.

पापा की सूरत तुमने है पाई,
प्रभु की कृपा से जीवन में आई
लाडली हमारी है दोनों कलि,
मेरे दो नैनों की ज्योति हो तुम.

राधिका तुम अम्बिका तुम,
मेरे दो नैनों की ज्योति हो तुम

- आणल अन्जारिया