कलाम: गुलज़ार
संगीतकार: आर. डी. बर्मन
स्वर: आशा भोसले
उम्मीद होगी कोई
रात ढले वर्ना कोई आता नहीं
किसने ये पुकारा
जब भी कोई आहट सी होती है
जाने कैसी दिल में ये घबराहट सी होती है
कोई लम्हा लौटा है बेचारा
आँखें ढूंढें साये आवाज़ों के
सूने सूने चेहरे हैं बस खाली दरवाजों के
शायद कोई है, किसने फिर पुकारा
(प्रेषक: प्रणय वसावडा)
